राजनीति शुचिता की जगह व्यवसाय में तब्दील होती जा रही है| ऐसे में नटवर सिंह जैसे अनेक नाम हैं वो वक्त के साथ अपनी मूल्य नहीं बचाए रख पाए| इनकी स्थिति विभीषण सी हो गई और इन लोगों ने रिश्ते की दूरी को अपमान की तरह लेते हुए कीचड़ उछालने का तात्कालिक सुख लेना प्रारंभ कर दिया, जिसे स्वयं ही वक्त का तकाजा व नैतिकता की लडाई मान बैठे | इस लडाई में मद्दे की जगह व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप महत्वपूर्ण हो गए| ऐसे में जनता को राजनीति की कीचड़ में हंस की तरह मोती चुगने की दृष्टि विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए ताकि जनता यह भलीभांति समझ सके कि जिसके पास जो है वही तो दे सकता है|
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