जीवन एक लंबी कतार ही तो है| जन्म से लेकर मृत्यु तक स्कूल में,बस में,ट्रेन में,नौकरी में,बैंक-पोस्ट आफिस में,राशन की दुकान में,पासपोर्ट बनाने में,अस्पताल में,वायुयान में,मेट्रो में लोग यंत्रवत कतार में लग जाते हैं| होड़ रहती है कि कैसे शिक्षा, नौकरी, अस्पताल.. हर जगह आगे निकल जाएँ| यह आगे निकलने की होड़ ही उर्जा भी है,जीवंतता भी है,मज़बूरी भी है और जीवन की अर्थवत्ता का खोना भी है|
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