व्यवस्था विरोध अक्सर व्यक्तिगत विरोध में तब्दील हो परस्पर आरोप-प्रत्यारोप एवं घृणा का शिकार हो जाता है एवं अपना मूल अर्थ खो देता है।
Translate
Tuesday, 30 January 2018
Saturday, 20 January 2018
Friday, 19 January 2018
मुद्दे
मुद्दे अफ़ीम की तरह हो गए हैं । जनता को नशे की तरह आंदोलित करते हैं और फिर जेहन से उतर जाते हैं।
Thursday, 18 January 2018
नाकामयाबी
कई बार वक्त के किसी ख़ास मुक़ाम पर लोग अपनों के लिए अनजान बन जाते हैं और बदलते वक्त में वे अपनों की निग़ाह में अनजान हो जाते हैं। इस तरह तमाम क़ामयाबी के बाद भी लोग अपने जीवन में ही नाकामयाब हो जाते हैं।
Wednesday, 17 January 2018
Tuesday, 16 January 2018
Saturday, 13 January 2018
रास्ता
कई बार आपकी बात तो सही होती है पर अपनी बात कहने के लिए आप रास्ता गलत अख़्तियार कर लेते हैं और सही होते हुए भी ख़ुद को ग़लत साबित कर देते हैं।
Thursday, 11 January 2018
Sunday, 7 January 2018
कसाई
बकरे की नज़र में कसाई तब तक महान बना रहता है जब तक कि दूसरे बकरे उसके सामने कटते रहते हैं और वह बचा रहता है।
Saturday, 6 January 2018
Friday, 5 January 2018
पहचान
नदी से नाराज़ होकर अलग होने वाले जलाशय अक्सर अपने अस्तित्व से कट जाते हैं और बारिश की बूंदों के मोहताज़ होकर अपनी पहचान खो देते हैं।
Tuesday, 2 January 2018
Monday, 1 January 2018
प्रेम
प्रेम की खूबसूरती यह है कि वह बेशर्त एवं बेपनाह होता है और जहाँ शर्त एवं सीमाएं होती हैं वहाँ प्रेम नहीं होता।
विवेक शून्यता
किसी को पसंद-नापसंद करने की आपकी व्यक्तिगत सोच-समझ पर जब दुनियावी प्रवृति हावी होने लगती है तब आप अपनी विवेक शून्यता की ओर अग्रसर होने लगते हैं।
बाजी
कई बार आपको अपने सबसे कमजोर साथी पर ही सबसे ज्यादा भरोसा करना पड़ता है क्योंकि वही उस वक्त हारी हुई बाजी पलटने में सक्षम होता है।
Subscribe to:
Posts (Atom)