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Thursday, 31 December 2015

ग़रीबों पर अमीर राजनीति

अजीब राजनीति है देश कि दया दिखाने गरीब की झोपड़ी जाएंगे| फोटो के लिए ग़रीब के साथ सूखी रोटी खाएंगे| अमीरी का सपना दिखाकर गरीबों को बाटेंगे|जादुई तरीके से रातो-रात ग़रीबी दूर करने का वादा करेंगे| गरीबों की हत्या एवं आत्महत्या पर नकारात्मक राजनीति करेंगे| चुनाव में ग़रीब तक पहुँचने के लिए रात दिन एक कर देंगे और चुनाव के बाद ग़रीबी पर चिंतन करने विदेश जाएंगे लेकिन ग़रीबी दूर नहीं कर पाएंगे चाहे अकूत अवैध संपत्ति के लिए ख़ुद पर छापा पड़ जाए और जेल हो जाए|

Sunday, 27 December 2015

लेखन का औचित्य

जब लेखन प्रेमचंद सरीखे रचनाकारों की तरह किसी खास और बड़े मकसद के लिए छोटे से छोटे लोगों की जीवन शैली को केंद्रित करके चलता है तभी अमरत्व को प्राप्त होता है और लेखक बड़े मुद्दों के साथ जीते हुए बड़ा और सार्थक बन पाते हैं अन्यथा चाटुकारिता पूर्ण एवं एक-दूसरे की बैशाखी के साथ गुमराह लेखन गिरोह का शिकार बन कुंए के पानी सा ठहराव उत्पन्न करता है जिससे शायद ही जनमानस का गला तर हो| हिंदी में आजकल ड्राइंग रूम वाले ऐसे कवि, आलोचक, लेखक सक्रिय हो गए हैं जो आपस में एक-दूसरे की पूंछ पकड़ कर जी रहे हैं और पुरुस्कार का तमगा भी पाने में कामयाब हो रहे हैं| ऐसे लेखक  को हिंदी का अभिशप्त लेखक कहा जा सकता है|

Thursday, 24 December 2015

छद्म देशद्रोह

कई बार छद्म देशद्रोह आतंकवाद, देशद्रोह से ज्यादा ख़तरनाक साबित होता है क्योंकि नकारात्मकता स्वार्थलोलुपता के साथ मिलकर बहुत तेजी से जनमानस में व्याप्त हो जाती है और इसे फ़ैलाने में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोग क्षुद्र लाभ के लिए शामिल होते हैं व वैमनस्य का वातावरण तैयार कर आपसी सौहार्द को कायम नहीं होने देते|