आतंकवादी से ज्यादा खतरनाक है आतंकी विचार | आतंकवादी व्यक्ति की हत्या करते हैं जबकि आतंकी विचार मानवीय प्रेम एवं विश्वास को कलंकित करता है| आतंकवादी से लडाई प्रत्यक्ष है जबकि आतंकी विचार अप्रत्यक्ष रूप से कट्टरता के द्वारा अपने पीछे विचारधारात्मक हुजूम इक्कठा कर लेता है और यही कट्टरता आजकल हर कहीं सहज सोच एवं सकारात्मकता पर किसी न किसी रूप में हावी है|
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Tuesday, 30 December 2014
Saturday, 27 December 2014
Wednesday, 24 December 2014
रहम की भीख
रहम की भीख मांगने वाले बकरे जल्दी काट दिए जाते हैं ताकि दूसरे बकरे बगावत न कर बैठें एवं अपनी गर्दन बिना किसी जोर जबरदस्ती के कटने हेतु टिकाए रखें|
तुम किसी गैर को चाहोगी तो मुश्किल होगी?
कई बार सम्मान अपनी सार्थकता खो बैठता है| अटल बिहारी बाजपेयी जी को यह सम्मान अगर बीमार होने से पहले मिलता तो उनके लिए सार्थक था| ऐसे ही अन्य महापुरुषों को यह सम्मान उनके जीते जी मिलता तो उनके लिए गौरव की बात होती| अक्सर देखा जाता है व्यक्ति तो गुमनामी में मर जाता है पर बाद में वह सम्मान का हक़दार हो जाता है या उसके नाम पर ही सम्मान चल पड़ता है| यह ऐसे ही है जैसे मीडिया के कुछ लोग बाढ़ में डूब रहे लोगों से पूछते हैं कि कैसा लग रहा है? शायद इसलिए भी भारतीय राजनीति में दो परंपराएँ चल पड़ी है एक खुद ही स्मारक बनाने की; दूसरी अपने लोगों को स्वयं ही महिमामंडित करने की,चाहे उसकी जन स्वीकार्यता हो या नहीं क्या फर्क पड़ता है? किंतु कुछ ऐसे भी ज्ञानी हैं जिन्हें कहीं से सम्मान मिल जाए तुरंत ले लें परंतु बड़े से बड़े लोगों के सम्मान पर भी ऊँगली उठाने से परहेज नहीं करते| सम्मान मिलने से ज्यादा महत्वपूर्ण है यह देखना कि सम्मान देने की पीछे की भावना क्या है? पर यह देखने की फुर्सत किसे है? यहाँ तो लोगों को एक ही गम है-- तुम किसी गैर को चाहोगी तो मुश्किल होगी?
Thursday, 18 December 2014
हिंसा
सामाजिक असमानता एवं धर्मान्धता हिंसा की मुख्य वजह है जो नीच राजनीतिक व क्षुद्र स्वार्थ कारणों से और भी घृणित एवं वीभत्स हो सम्पूर्ण मानवता को कलंकित एवं शर्मसार कर रही है|
Saturday, 13 December 2014
आत्म धर्म
जैसे ही आप किसी दल,संगठन,संस्थान आदि की सीमाओं से बंधते हैं: आप उस दल, संगठन, संस्थान के पिंजड़े का तोता बन जाते हैं| सही को सही और गलत को गलत कहने की आपकी विवेकशीलता पर उस दल,संगठन,संस्थान का शिकंजा इतना कसा होता है कि आप पिंजड़ा धर्म निभाने के लिए हर गलत काम को न्यायोचित सिद्ध करने में अपनी नैसर्गिक प्रतिभा का हनन करने लगते हैं एवं उस दल,संगठन,संस्थान को बनाने में खुद अपना नैतिक पतन कर लेते हैं और वही दल,संगठन,संस्थान कई बार आपको मक्खी की तरह निकालकर बाहर भी फेंक देता है| ऐसे में आत्म धर्म ही आपका संबल बनता है|
Wednesday, 10 December 2014
मलाला का नोबेल
यह देखना दिलचस्प होगा कि नोबल पुरुस्कार प्राप्त करते समय मलाला के शिक्षा अधिकार एवं आतंकविरोधी बयान को पाकिस्तान किस तरह पढ़ता है| ऐसे समय में जब पाकिस्तान पहचान की संकट से गुजर रहा हो मलाला उसके लिए गर्व बनकर सामने आई है,परंतु पाकिस्तान की राजनीति व आतंकवाद पर मलाला का यह सम्मान कितना भारी पड़ेगा यह वक्त ही बताएगा|
Monday, 8 December 2014
बलात्कार
बलात्कार की घटना को पुरुष बनाम स्त्री एवं पीड़ित बनाम दोषी तक सीमित कर देना अदूरदर्शिता की निशानी है| प्रतीकों,प्रदर्शनों एवं मीडिया को केंद्र में लाकर एकाध लड़ाई लड़ी जा सकती है,परंतु व्यवस्था परिवर्तन के लिए नागरिक,सत्ता तंत्र,न्याय तंत्र की जिम्मेदारी तय करने के साथ स्त्री-पुरुष समानता के अधिकार सहित ऐसे माहौल के निर्माण करने की जरुरत है जहाँ गलत करने के प्रति भय दंड की अनुभूति हो|
Thursday, 4 December 2014
भाषा की कठोरता का सवाल
वर्तमान समय-समाज में व्यक्ति पर सामाजिक विडंबनाओं व प्रतिस्पर्धा का इस कदर मानसिक दबाव है कि व्यक्ति के मन की भाषा और स्वार्थ की भाषा में भारी अंतर आ गया है जिसके कारण अधिकांश राजनीतिज्ञ,बुद्धिजीवी,प्रशासक,बाबा सभी दोहरे चरित्र का शिकार हो गए हैं| भाषा की कठोरता स्वार्थपूर्ण व्यक्तित्व के कठोरता की ही उपज है जो दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति को भी रेखांकित करती है| ऐसे में जीवन को सुगम व चिंतन को सकारात्मक बनाने की जरुरत है क्योंकि अहम,दुर्भावना से जुड़ी भाषा हिंसक भाषा में तब्दील हो असभ्य समाज का निर्माण कर रही है,जिसका परिणाम अंततः विनाशकारी है|
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