जीवन की सार्थकता स्वयं से मांगने एवं दूसरों को देने में है| स्वयं के प्रकाश से दूसरे के अँधेरे को मिटाने में है| दीपोत्सव आपको सामर्थ्यवान एवं परिपूर्ण बनाए,ऐसी शुभकामना है|
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Thursday, 23 October 2014
Sunday, 19 October 2014
Sunday, 12 October 2014
'हैदर'
'हैदर' फिल्म के केंद्रबिंदु में 'पिता का इंतकाम' है जो आतंकवाद में तब्दील हो जाता है| आतंकवादी की मानवीयता के आधार पर इलाज करने वाले हैदर के पिता की गुमशुदगी की वजह भारतीय सेना को बताया गया है| भारतीय सेना की यंत्रणा से आतंकवाद को पनपते हुए दिखाया गया है| पूरे फिल्म में भारतीय सेना कश्मीर में ज्यादती करते दिखाई गई है| वहीँ अंत में फिल्म की शूटिंग के लिए भारतीय सेना को ही धन्यवाद दिया गया है| एक आम मुस्लिम की छवि आजाद कश्मीर के रूप में पेश की गई है| हैदर द्वारा अपने माँ के चरित्र पर लांछन लगाते दिखाया गया है| फिल्म के निर्देशक विशाल भारद्वाज फिल्म की कथावस्तु को तार्किक आधार नहीं दे पाए हैं | सनसनीखेज घटनाओं के समुच्चय द्वारा 'हैदर' फिल्म दहशतगर्द लोगों के लिए एक मनोरंजक फिल्म बन गई है जो मानवीयता का माखौल उड़ाते दिखती है|
Friday, 10 October 2014
उजाले की मंजिल
बाल श्रम उन्मूलन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दे के लिए श्री कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिलना गर्व का विषय है वहीँ उनके योगदानों को अपने ही देश की सरकार द्वारा उपेक्षित किया जाना यह रेखांकित करता है कि देश में सत्यनिष्ठा, कर्मशीलता अथार्त कर्म से गाँधीवादी होने का मूल्य क्या है? सचमुच भारत के राजनीतिज्ञों के लिए शर्म का विषय है कि वह एक उजाले को भी अँधेरे में दबाए रहे जबकि उजाले ने अपनी मंजिल खुद ही तय कर ली|
Thursday, 9 October 2014
कश्मीर की जनता
प्रकृति की मार झेल चुके कश्मीर की जनता पर पाकिस्तान की अस्थिर सरकार द्वारा की जा रही निरंतर गोलाबारी यह साबित करती है कि पाकिस्तान अपनी जर्जर अर्थव्यवस्था एवं बुरे हालात से अपने आवाम का ध्यान हटाने के लिए कश्मीर की भावनाओं को भड़काकर अपनी जनता को गुमराह करता है और भारत के प्रति प्रतिशोध की भावना के जरिए भारत विरोधी देशों से राजनीतिक कामयाबी हासिल करता है|
Tuesday, 7 October 2014
बेगुनाह लोगों की जान
जब प्रशासनिक चूक एवं राजनीतिक नाकामी से बेगुनाह लोगों की जान चली जाती है और दुर्घटना की जांच व कार्रवाई दस्तावेजों में दफ़न हो जाती है| ऐसे में जब सियासत मोमबत्ती जलाकर एवं मुआवजा की घोषणा कर अपनी पीठ थपथपाता है तो मन सिहर जाता है| जिन लोगों पर बेगुनाहों की जान लेने का मुक़दमा चलना चाहिए वे ही मौत का सौदा करते हैं और बड़े फक्र से बेमौत की कीमत 3 लाख लगाकर जनता का मजाक उड़ाते हैं| अगर कोई वकील मित्र सर्वोच्च न्यायालय में पी आई एल डालकर भारत / राज्य सरकार से अब तक गठित जांच समितियों एवं उस पर हुई कार्रवाई के संबंध में कोई ठोस पहल कर सकें तो इसका दूरगामी असर हो सकता है|
पद की गरिमा
राष्ट्रपति की तरह प्रधानमंत्री एवं मंत्री मंडल का दायित्व भी दलगत राजनीति एवं विचारधारा से ऊपर उठकर पूरे देश को एक साथ लेकर चलने के लिए होना चाहिए और इसी आशय का शपथ सांविधानिक पद पर बैठे नेता गण लेते भी हैं| फिर चुनाव प्रचार के समय प्रधानमंत्री, मंत्री गण एवं सांविधानिक पद पर बैठे नेता गण अपने दल के प्रचार हेतु विरोधियों की ऐसी आलोचना करते हैं कि उनके मन की घृणा साफ़ दिखने लगती है एवं सौहार्द पूर्ण माहौल दूषित होने लगता है; प्रधानमंत्री, मंत्री गण एवं सांविधानिक पद की गरिमा गिरने लगती है| काश ऐसा हो सके कि सांविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति अपने पद की गरिमा बचाने के लिए तात्कालिक लोभ से स्वयं को मुक्त कर सकें तो स्वच्छ छवि का निर्माण हो एवं राजनीति के प्रति आमलोगों में सकारात्मक धारणा बन सके|
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