राष्ट्रपति की तरह प्रधानमंत्री एवं मंत्री मंडल का दायित्व भी दलगत राजनीति एवं विचारधारा से ऊपर उठकर पूरे देश को एक साथ लेकर चलने के लिए होना चाहिए और इसी आशय का शपथ सांविधानिक पद पर बैठे नेता गण लेते भी हैं| फिर चुनाव प्रचार के समय प्रधानमंत्री, मंत्री गण एवं सांविधानिक पद पर बैठे नेता गण अपने दल के प्रचार हेतु विरोधियों की ऐसी आलोचना करते हैं कि उनके मन की घृणा साफ़ दिखने लगती है एवं सौहार्द पूर्ण माहौल दूषित होने लगता है; प्रधानमंत्री, मंत्री गण एवं सांविधानिक पद की गरिमा गिरने लगती है| काश ऐसा हो सके कि सांविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति अपने पद की गरिमा बचाने के लिए तात्कालिक लोभ से स्वयं को मुक्त कर सकें तो स्वच्छ छवि का निर्माण हो एवं राजनीति के प्रति आमलोगों में सकारात्मक धारणा बन सके|
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