जिंदगी और कर्म को बोझ नहीं बल्कि संगीत एवं आनंद का पर्याय बनाएं ताकि जीवन व्यर्थता से सार्थकता की ओर सहज ही गतिमान हो सके|
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Sunday, 20 November 2016
पहचान
खेमेबाज़ी की वजह से बेवजह एक दूसरे की नापाक हरकतों में सुर से सुर मिलाते चेहरे बहुत बेसुरे व सारहीन बनकर अपनी पहचान खो देते हैं|
लड़ाई
जब आप लड़ाई लड़ते हैं तो प्रतिघात के साथ आघात सहने की भी क्षमता होनी चाहिए।इससे लड़ाई को नई धार हासिल होती है।
प्रेम और नफ़रत
प्रेम और नफ़रत से ऊपर संबंधों का एक आसमान है।प्रेम व नफ़रत से परे जाकर क़ाबलियत उस संबंध को निभाने की होनी चाहिए जहां जिंदगी आनंद का आसमान बन जाए।
प्रेम
प्रेम करना महत्वपूर्ण है परंतु उस प्रेम को अपने अंदर हर हाल एवम् विषम परिस्थिति में भी अनवरत जिंदा रखना ज्यादा महत्वपूर्ण व मानवीय होना है।
मंजिल
जो रास्ता बेहद खूबसूरत व दिल को सुकून देने वाला हो पर मंजिल के विपरीत हो, भटकाता ही है और जिंदगी भटकने के लिए नहीं मंजिल तक पहुंचने के लिए है।
जीवन
जीवन में संबंध, समस्याएं, सफलताएं एवम् स्वास्थ्य एक सी नहीं रहतीं परंतु संबंध को सम्मान देने, समस्याओं को सुलझाने, सफलता एवम् स्वास्थ्य को बनाए रखने का निरंतर प्रयास तथा स्वयं व अन्य के प्रति दिल से प्रेम एवम् विश्वास कभी कम नहीं होना चाहिए।
दृष्टि
अगर दृष्टि संकुचित हो तो बौने व्यक्तित्व के आगे खड़ा होकर अपना व्यक्तित्व तराशने में खुद के छोटे हो जाने का ख़तरा ज्यादा है।
मृत मौन
अपने समय-समाज की समस्याओं पर मौन हो जाना शांतिप्रिय हो जाना नहीं बल्कि स्वयं के विचारों का मृतप्राय हो जाना है।
आलोचना
सार्वजनिक जीवन में आलोचना आभूषण की तरह है। आप चाहें तो स्वयं का व्यक्तित्व उज्ज्वल कर लें या स्वयं को आलोचनात्मक आभूषण की जंजीर में जकड़े हुए कुर्बान कर दें।
आतंकी मानसिकता
कमी मोदी सरकार में भी है और मनमोहन सरकार में भी थी इसलिए आलोचना व प्रशंसा पसंद-नापसंद की जगह जनहित के व्यापक संदर्भ में की जानी अपेक्षित है परंतु घृणित मानसिकता वाले कुछ लोग, मीडिया, दल हर मुद्दे पर आम जन को गुमराह कर देश एवं सरकार को नीचा दिखाने पर आमदा हैं।
देश व समाज के समक्ष एक गंभीर आंतरिक चुनौती छोटी एवं क्षुद्र सोच से उपजी हुई यह आतंकी मानसिकता भी है जो कि आतंकवाद से कम ख़तरनाक नहीं।
अन्याय
व्यक्ति की परिस्थिति, अनुभव एवं मनोभाव को समझे बिना प्रतिक्रिया व्यक्त कर देना उस व्यक्ति के प्रति अन्याय कर देना है।
हार का कारण
अपनी असीम ताकत को पहचाने बिना छोटी-छोटी समस्याओं से घिरे रहने की मानसिक प्रवृति ही अक्सर हार का कारण बनती है।
विचार
विचारों के कंकड़ में फंसकर विचारों की विशालता, जीवंतता, अर्थपूर्णता एवं वैचारिक सौंदर्य खो जाता है।
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