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Saturday, 17 December 2016

जिंदगी

जिंदगी छोटे लक्ष्यों व क्षणिक सुख के वशीभूत होकर जीने का नाम नहीं अपितु बड़े सार्थक लक्ष्यों एवं सीमित समय में स्वयं के असीमित मानवीय व प्रेमपूर्ण विस्तार का नाम है ।

नोट बंदी

नोट बंदी के बाद ए टी एम असुविधा, दो हज़ार के नोट से जुड़े प्रश्न, अपर्याप्त नए नोट की समस्या की वजह से उम्मीद से ज्यादा तक़लीफ़देह स्थिति जरूर है एवं व्यापक विरोध की वजह भी परंतु इस संबंध में भ्रष्टाचार विरोध मुहिम की वजह से एक आम स्वीकार्यता भी बढ़ रही है वाबजूद इसके सरकार की मंशा पर सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार संदेह किया जाना सार्थक नहीं लगता अगर इसका अंजाम गरीबों का सचमुच कल्याण करना साबित हो।

बाधक

विकलांग तन नहीं विकलांग मन मानवीयता के लिए बाधक|

लक्ष्य

जब आप अपनी कमियों की वजह से हारने लगते हैं तब साधारण एवं आसान लक्ष्य भी कठिन लगने लगते हैं।

Sunday, 20 November 2016

जिंदगी और कर्म

जिंदगी और कर्म को बोझ नहीं बल्कि संगीत एवं आनंद का पर्याय बनाएं ताकि जीवन व्यर्थता से सार्थकता की ओर सहज ही गतिमान हो सके|

पहचान

खेमेबाज़ी की वजह से बेवजह एक दूसरे की नापाक हरकतों में सुर से सुर मिलाते चेहरे बहुत बेसुरे व सारहीन बनकर अपनी पहचान खो देते हैं|

लड़ाई

जब आप लड़ाई लड़ते हैं तो प्रतिघात के साथ आघात सहने की भी क्षमता होनी चाहिए।इससे लड़ाई को नई धार हासिल होती है।

प्रेम और नफ़रत

प्रेम और नफ़रत से ऊपर संबंधों का एक आसमान है।प्रेम व नफ़रत से परे जाकर क़ाबलियत उस संबंध को निभाने की होनी चाहिए जहां जिंदगी आनंद का आसमान बन जाए।

मजबूरी

सबसे बुरा है जमीर गिरवी रखकर मजबूरी में हाँथ फैलाना और खाली हाँथ लौट जाना।

प्रेम

प्रेम करना महत्वपूर्ण है परंतु उस प्रेम को अपने अंदर हर हाल एवम् विषम परिस्थिति में भी अनवरत जिंदा रखना ज्यादा महत्वपूर्ण व मानवीय होना है।

मंजिल

जो रास्ता बेहद खूबसूरत व दिल को सुकून देने वाला हो पर मंजिल के विपरीत हो, भटकाता ही है और जिंदगी भटकने के लिए नहीं मंजिल तक पहुंचने के लिए है।

जीवन

जीवन में संबंध, समस्याएं, सफलताएं एवम् स्वास्थ्य एक सी नहीं रहतीं परंतु संबंध को सम्मान देने, समस्याओं को सुलझाने, सफलता एवम् स्वास्थ्य को बनाए रखने का निरंतर प्रयास तथा स्वयं व अन्य के प्रति दिल से प्रेम एवम् विश्वास कभी कम नहीं होना चाहिए।

क्षमता

हार की वजह चुनौती नहीं बल्कि आपकी क्षमता होती है जिसे अमूमन आप कम आंकते हैं।

दृष्टि

अगर दृष्टि संकुचित हो तो बौने व्यक्तित्व के आगे खड़ा होकर अपना व्यक्तित्व तराशने में खुद के छोटे हो जाने का ख़तरा ज्यादा है।

आवाज

खुद की बांसुरी को किसी की आवाज का मोहताज ना बनाओ।

अनुयायी

जैसे ही आप किसी के अनुयायी बनते हैं आप उससे पार जाने की क्षमता खो देते हैं।

प्रेम

संसार के सारे जख़्म यदि दवा से ठीक हो जाते तो प्रेम की अहमियत ही खत्म हो जाती।

करीब

कोई हमारे कितना भी करीब क्यों न हो कई बार उस तक पहुंचने में बहुत देर हो जाती है।

मृत मौन

अपने समय-समाज की समस्याओं पर मौन हो जाना शांतिप्रिय हो जाना नहीं बल्कि स्वयं के विचारों का मृतप्राय हो जाना है।

आलोचना

सार्वजनिक जीवन में आलोचना आभूषण की तरह है। आप चाहें तो स्वयं का व्यक्तित्व उज्ज्वल कर लें या स्वयं को आलोचनात्मक आभूषण की जंजीर में जकड़े हुए कुर्बान कर दें।

समस्या

समस्याओं का समाधान न कर पाना समस्याओं की मजबूती नहीं स्वयं की क्षमता की कमजोरी है।

आतंकी मानसिकता

कमी मोदी सरकार में भी है और मनमोहन सरकार में भी थी इसलिए आलोचना व प्रशंसा पसंद-नापसंद की जगह जनहित के व्यापक संदर्भ में की जानी अपेक्षित है परंतु घृणित मानसिकता वाले कुछ लोग, मीडिया, दल हर मुद्दे पर आम जन को गुमराह कर देश एवं सरकार को नीचा दिखाने पर आमदा हैं।
देश व समाज के समक्ष एक गंभीर आंतरिक चुनौती छोटी एवं क्षुद्र सोच से उपजी हुई यह आतंकी मानसिकता भी है जो कि आतंकवाद से कम ख़तरनाक नहीं।

मूर्ख

सारी दुनिया को मूर्ख समझने वाला व्यक्ति स्वयं मूर्ख होता है।

अन्याय

व्यक्ति की परिस्थिति, अनुभव एवं मनोभाव को समझे बिना प्रतिक्रिया व्यक्त कर देना उस व्यक्ति के प्रति अन्याय कर देना है।

जीवन

जीवन सार्थकता की तलाश है।

मौन

मौन ह्रदय की मुखर आवाज है|

राम

रावण के खिलाफ लड़ते हुए खुद को रावण बनने से बचा लेना ही राम हो जाना है।

अनर्थ को अर्थ

कई बार हम किसी के प्रति इतने समर्पित हो जाते हैं कि उसके अनर्थ को अर्थ देने लगते हैं।

दिल

अंततः बड़ा वही जिसका दिल भी बड़ा हो।

हार का कारण

अपनी असीम ताकत को पहचाने बिना छोटी-छोटी समस्याओं से घिरे रहने की मानसिक प्रवृति ही अक्सर हार का कारण बनती है।

विचार

विचारों के कंकड़ में फंसकर विचारों की विशालता, जीवंतता, अर्थपूर्णता एवं वैचारिक सौंदर्य खो जाता है।

प्रेम

ताकत से भी ताकतवर अगर कोई है तो वह प्रेम ही है।

Tuesday, 19 January 2016

सम्मान वापसी

जब सम्मान राजनीति का पक्षधर हो जाता है तब 'सम्मान वापसी' से भी सम्मान प्राप्त होने लगता है और सम्मान की मूल भावना का अपमान हो जाता है| इसलिए सम्मान वापसी को एक मात्र हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की बजाय विद्वत जन व्यापक जन हित में ठोस एवं निर्णायक लड़ाई लड़ने हेतु बेहतर रणनीति बनाने की क़वायद करें तो बेहतर है ताकि जन मानस की संवेदना एवं विश्वास का समर्थन भी हासिल हो सके,परंतु इसके लिए आवश्यक है भेदभाव रहित होकर हर मुद्दे पर ठोस आवाज बुलंद करने की अन्यथा बड़े से बड़े कदम एकांगी दृष्टिकोण की वजह से ढ़कोसला में तब्दील हो मानवता का माखौल उड़ाने लगते हैं|

Sunday, 17 January 2016

हौसले का आसमान

चुनौतियों की जमीन से हौसले का आसमान हमेशा बड़ा होता है।

Thursday, 14 January 2016

संबंधों की आयु सीमा

हर संबंध की एक आयु सीमा होती है उसके बाद वह संबंध या तो दिल में चुभता रहता है या खुशबू बिखेरता रहता है।

कहने और करने का फर्क

कुछ चींजे कहने की होती है और कुछ करने की| दुर्भाग्य है कि राजनीतिक स्तर पर, संचार के स्तर पर, प्रशासनिक स्तर पर यहाँ तक कि व्यक्तिगत संबंध के स्तर पर हम कहते कुछ हैं करते कुछ हैं और देश-दुनिया-समाज में अनावश्यक ही अपनी भद्द पिटवा कर अपनी साख मिट्टी में मिलवा लेते हैं|

नाटकीय वर्ताव

द्वेषपूर्ण भाव के साथ किए गए अच्छे व नाटकीय वर्ताव का फल भी अंततः दुखदायी होता है|

समाधान

समस्याओं के समाधान तभी सार्थक होते हैं जब जन सामान्य का विश्वास अर्जित करते हुए वास्तविक व सकारात्मक सोच आधार पर दूरगामी नीति का कार्यान्वयन किया जाए|

सामाजिक सरोकार

सामाजिक सरोकार कार्य की सफलता आर्थिक सहयोग से ज्यादा दूसरे की पीड़ा महसूस करने की क्षमता, आर्थिक पारदर्शिता, व्यापक उद्देश्य, अवरोधक ताकतों से जूझने की अदम्य इच्छा शक्ति एवं समाज के सबसे निचले पायदान पर बैठे व्यक्ति के प्रति समर्पण भाव की निरंतरता पर निर्भर है|

हार और जीत का अंतर

बलपूर्वक आप किसी को हरा सकते हैं किंतु सिर्फ प्रेमपूर्वक ही आप उसे जीत सकते हैं|

पत्थर

कई बार पत्थर तराशते-तराशते उस पत्थर में तो जान आ जाती है पर आदमी पत्थर हो जाता है|

Friday, 8 January 2016

संबंध

हर संबंध की एक आयु सीमा होती है उसके बाद वह संबंध या तो दिल में चुभता रहता है या खुशबू बिखेरता रहता है।

Wednesday, 6 January 2016

विश्वास

कुछ ऐसे दोस्त होते हैं जिनसे दोस्ती करके दोस्ती पर से विश्वास उठ जाता है और कुछ ऐसे अजनबी भी होते हैं जिनसे मिलकर जिंदगी रोशन हो जाती है|

आतंरिक आनंद

सबके मायूस चेहरे पर अपनी हुनर की ख़ुशी बिखरने वाले व्यक्ति को सिर-आँखों पर बिठाने की बजाय लोग उसे तात्कालिक हँसी के लिए उपहास का पात्र तक बना डालते हैं | इसलिए हर एक को प्रसन्नचित रखना एवं उससे प्रशंसा की चाहत रखना कई बार मूर्खता सिद्ध होती है| बेहतर है अपने आंतरिक आनंद के साथ स्व व्यवहार बनाए हुए अपने उद्देश्यों के प्रति प्रशंसा-निंदा से परे होकर समर्पित भाव से कार्य करना|

संक्रामक राजनीति का दौर

संक्रामक रोग की तरह राजनीतिक मुद्दे भी संक्रामक हो गए हैं| कुछ दिन की हायतौबा फिर टायं-टायं फिस| सुरक्षा,शिक्षा,स्वास्थ्य जैसे अहम मसलों पर भी कोई सर्वसहमत दीर्घकालिक योजना नहीं,दूरगामी सोच नहीं| एक-दूसरे पर आरोप्र-प्रत्यारोप से देश का सुदृढ़ विकास करने का खांका मीडिया के सहारे खींचा जा रहा है| समझ में नहीं आता कि देश की दशा-दिशा सरकार तय कर रही है या मीडिया| मान-अपमान,भाषा की गिरावट, बेशर्मी, अपराधीकरण राजनीति की पहचान बनती जा रही है और जनता आसमान में सपने बुन रही है|

Saturday, 2 January 2016

नजरिया

जीवन में बौद्धिक हो जाना,आतंकी हो जाना, कट्टर हो जाना, प्रेम पूर्ण हो जाना, अंगुलिमाल का ह्रदय परिवर्तन हो जाना, विद्योत्तमा की उपेक्षा से कालिदास बन जाना, मृत्यु शय्या देखकर गौतम का बुद्ध बन जाना सबकुछ नजरिया बदल जाने का परिणाम है| इस अर्थ में जीवन एक नजरिया ही है| जीवन की समस्याएँ एवं उससे निपटने की अलग-अलग मानसिक क्षमताएं व्यक्ति के अपने नजरिए पर ही निर्भर है| 

अँधेरे को उजाले का उपहार

समय एवं समाज की मूल्यहीनता की वजह से कभी-कभी लगता है कि अपने ही सकारात्मक विचारों का साथ छूट रहा है| वक्त की नकारात्मक सोच स्वयं की सृजनात्मकता पर हावी हो रही है| संबंधों के लिए किया गया सार्थक प्रयास अनायास ही निरर्थक साबित हो रहे हैं| उत्कृष्ट कर्म सच्ची प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के मोहताज हो गए हैं परन्तु जीवन का व्यापक उद्देश्य सामयिक एवं स्वार्थपूर्ण निंदा-प्रशंसा से परे अपने दूरगामी सार्थक लक्ष्य में धैर्यपूर्ण, शांतिपूर्ण व प्रेमपूर्ण तरीके से कामयाब हो जाना है| वक्त के घनघोर अँधेरे में अपने व्यक्तित्व की सार्थकता एवं उत्कृष्टता का अनवरत दीप जलाए रखना है और यही संकल्प नव वर्ष में हम सब का जीवन लक्ष्य बने तो अँधेरे को उजाले का उपहार मिले|