सबके मायूस चेहरे पर अपनी हुनर की ख़ुशी बिखरने वाले व्यक्ति को सिर-आँखों पर बिठाने की बजाय लोग उसे तात्कालिक हँसी के लिए उपहास का पात्र तक बना डालते हैं | इसलिए हर एक को प्रसन्नचित रखना एवं उससे प्रशंसा की चाहत रखना कई बार मूर्खता सिद्ध होती है| बेहतर है अपने आंतरिक आनंद के साथ स्व व्यवहार बनाए हुए अपने उद्देश्यों के प्रति प्रशंसा-निंदा से परे होकर समर्पित भाव से कार्य करना|
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