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Sunday, 25 October 2015

रचनाएँ

रचनाएँ पुरानी नहीं होतीं बल्कि बदलते वक्त के साथ नए अर्थ से परिपूर्ण होती हैं|

Friday, 16 October 2015

मंथरा एवं शकुनि

राम-रावण एवं कौरव-पांडव के युद्ध में सत्ता पराजित हुई किंतु मंथरा एवं शकुनि से सभ्यता, संस्कृति एवं शांति आहत हुई| इसलिए मंथरा एवं शकुनि जैसी ओछी मानसिकता को दरकिनार करके ही परस्पर प्रेम व भाईचारा को जिंदा रखा जा सकता है|

Sunday, 4 October 2015

अहम एवं वहम

अहम एवं वहम जिंदगी का सत्यानाश करने के लिए काफ़ी है|

नेतृत्व

कुशल,संवेदनशील एवं दूरदर्शी नेतृत्व की कमी प्रशासन,राजनीति की खामी के रूप में उभर रही है| एक तपा एवं दर्द से गुजरा हुआ समाज द्वेष की चिंगारी मात्र से दो खेमों में बंट जाता है| अपार संभावनाओं से भरी सामाजिक दृष्टि व सोच राजनीतिक व प्रशासनिक इच्छा शक्ति के अभाव में संकुचित होने लगती है| भटकी हुई विचारधाराओं के तले मानवता बौनी होती जाती है| हजारों वर्षों के प्रेम पर पल भर की नादानी भारी पड़ने लगती है| जाने-अनजाने आम जनता इस बहसीपन का शिकार हो जाती है और गुनाहगार जिंदा रह जाता है हम सब में| मुमकिन है शांति पर वह अशांत है हमारे मन में|

संबंध

सभी संबंधों की अपनी सीमाएं हैं| हर संबंध को नाम दे देने से आप उसकी अच्छाईयों एवं बुराईयों में बंध जाते हैं| कई बार उसको ढ़ोते-ढ़ोते दम घूंटने लगता है| संबंधों की गरिमा को बचाए रखने के लिए बेहतर है कुछ संबंधों को सिर्फ अनाम रखा जाए, आत्मिक रखा जाए, असीम रखा जाए ताकि पूर्ण प्रेम, सजगता एवं शिद्दत से उसे निभाया जा सके| उसकी उर्जा को समाज में कलुषित होने से बचाया जा सके| वक्त के उस पार उसे जिंदादिली से जिंदा रखा जा सके जहाँ जाकर संबंध अक्सर खो जाते हैं|

सामाजिक अपच

गलत नियत से खाई गई हर चीज सामाजिक अपच का कारण बनती है|

Saturday, 3 October 2015

कवि मन

कवि मन तो बादल होता है जब बरसता है तो खुद को और जग को संवेदनाओं में भींगो देता है|

वक्त की आंच

व्यक्तिगत स्वतंत्रता के तथ्यों को वक्त की आंच में सेंकना गलत है|

उन्मादी गीत

अपनी महानता के लिए उन्मादी गीत गाना मानवता के लिए गलत है|