सभी संबंधों की अपनी सीमाएं हैं| हर संबंध को नाम दे देने से आप उसकी अच्छाईयों
एवं बुराईयों में बंध जाते हैं| कई बार उसको ढ़ोते-ढ़ोते दम घूंटने लगता है| संबंधों की गरिमा को बचाए रखने के लिए बेहतर है
कुछ संबंधों को सिर्फ अनाम रखा जाए, आत्मिक रखा जाए, असीम रखा जाए ताकि पूर्ण प्रेम, सजगता एवं शिद्दत से उसे निभाया जा सके| उसकी उर्जा को समाज में कलुषित होने से बचाया जा
सके| वक्त के उस पार उसे जिंदादिली
से जिंदा रखा जा सके जहाँ जाकर संबंध अक्सर खो जाते हैं|
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