जब सम्मान राजनीति का पक्षधर हो जाता है तब 'सम्मान वापसी' से भी सम्मान प्राप्त होने लगता है और सम्मान की मूल भावना का अपमान हो जाता है| इसलिए सम्मान वापसी को एक मात्र हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की बजाय विद्वत जन व्यापक जन हित में ठोस एवं निर्णायक लड़ाई लड़ने हेतु बेहतर रणनीति बनाने की क़वायद करें तो बेहतर है ताकि जन मानस की संवेदना एवं विश्वास का समर्थन भी हासिल हो सके,परंतु इसके लिए आवश्यक है भेदभाव रहित होकर हर मुद्दे पर ठोस आवाज बुलंद करने की अन्यथा बड़े से बड़े कदम एकांगी दृष्टिकोण की वजह से ढ़कोसला में तब्दील हो मानवता का माखौल उड़ाने लगते हैं|
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Tuesday, 19 January 2016
Sunday, 17 January 2016
Thursday, 14 January 2016
संबंधों की आयु सीमा
हर संबंध की एक आयु सीमा होती है उसके बाद वह संबंध या तो दिल में चुभता रहता है या खुशबू बिखेरता रहता है।
कहने और करने का फर्क
कुछ चींजे कहने की होती है और कुछ करने की| दुर्भाग्य है कि राजनीतिक स्तर पर, संचार के स्तर पर, प्रशासनिक स्तर पर यहाँ तक कि व्यक्तिगत संबंध के स्तर पर हम कहते कुछ हैं करते कुछ हैं और देश-दुनिया-समाज में अनावश्यक ही अपनी भद्द पिटवा कर अपनी साख मिट्टी में मिलवा लेते हैं|
समाधान
समस्याओं के समाधान तभी सार्थक होते हैं जब जन सामान्य का विश्वास अर्जित करते हुए वास्तविक व सकारात्मक सोच आधार पर दूरगामी नीति का कार्यान्वयन किया जाए|
सामाजिक सरोकार
सामाजिक सरोकार कार्य की सफलता आर्थिक सहयोग से ज्यादा दूसरे की पीड़ा महसूस करने की क्षमता, आर्थिक पारदर्शिता, व्यापक उद्देश्य, अवरोधक ताकतों से जूझने की अदम्य इच्छा शक्ति एवं समाज के सबसे निचले पायदान पर बैठे व्यक्ति के प्रति समर्पण भाव की निरंतरता पर निर्भर है|
Friday, 8 January 2016
संबंध
हर संबंध की एक आयु सीमा होती है उसके बाद वह संबंध या तो दिल में चुभता रहता है या खुशबू बिखेरता रहता है।
Wednesday, 6 January 2016
विश्वास
कुछ ऐसे दोस्त होते हैं जिनसे दोस्ती करके दोस्ती पर से विश्वास उठ जाता है और कुछ ऐसे अजनबी भी होते हैं जिनसे मिलकर जिंदगी रोशन हो जाती है|
आतंरिक आनंद
सबके मायूस चेहरे पर अपनी हुनर की ख़ुशी बिखरने वाले व्यक्ति को सिर-आँखों पर बिठाने की बजाय लोग उसे तात्कालिक हँसी के लिए उपहास का पात्र तक बना डालते हैं | इसलिए हर एक को प्रसन्नचित रखना एवं उससे प्रशंसा की चाहत रखना कई बार मूर्खता सिद्ध होती है| बेहतर है अपने आंतरिक आनंद के साथ स्व व्यवहार बनाए हुए अपने उद्देश्यों के प्रति प्रशंसा-निंदा से परे होकर समर्पित भाव से कार्य करना|
संक्रामक राजनीति का दौर
संक्रामक रोग की तरह राजनीतिक मुद्दे भी संक्रामक हो गए हैं| कुछ दिन की हायतौबा फिर टायं-टायं फिस| सुरक्षा,शिक्षा,स्वास्थ्य जैसे अहम मसलों पर भी कोई सर्वसहमत दीर्घकालिक योजना नहीं,दूरगामी सोच नहीं| एक-दूसरे पर आरोप्र-प्रत्यारोप से देश का सुदृढ़ विकास करने का खांका मीडिया के सहारे खींचा जा रहा है| समझ में नहीं आता कि देश की दशा-दिशा सरकार तय कर रही है या मीडिया| मान-अपमान,भाषा की गिरावट, बेशर्मी, अपराधीकरण राजनीति की पहचान बनती जा रही है और जनता आसमान में सपने बुन रही है|
Saturday, 2 January 2016
नजरिया
जीवन में बौद्धिक हो जाना,आतंकी हो जाना, कट्टर हो जाना, प्रेम पूर्ण हो जाना, अंगुलिमाल का ह्रदय परिवर्तन हो जाना, विद्योत्तमा की उपेक्षा से कालिदास बन जाना, मृत्यु शय्या देखकर गौतम का बुद्ध बन जाना सबकुछ नजरिया बदल जाने का परिणाम है| इस अर्थ में जीवन एक नजरिया ही है| जीवन की समस्याएँ एवं उससे निपटने की अलग-अलग मानसिक क्षमताएं व्यक्ति के अपने नजरिए पर ही निर्भर है|
अँधेरे को उजाले का उपहार
समय एवं समाज की मूल्यहीनता की वजह से कभी-कभी लगता है कि अपने ही सकारात्मक विचारों का साथ छूट रहा है| वक्त की नकारात्मक सोच स्वयं की सृजनात्मकता पर हावी हो रही है| संबंधों के लिए किया गया सार्थक प्रयास अनायास ही निरर्थक साबित हो रहे हैं| उत्कृष्ट कर्म सच्ची प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के मोहताज हो गए हैं परन्तु जीवन का व्यापक उद्देश्य सामयिक एवं स्वार्थपूर्ण निंदा-प्रशंसा से परे अपने दूरगामी सार्थक लक्ष्य में धैर्यपूर्ण, शांतिपूर्ण व प्रेमपूर्ण तरीके से कामयाब हो जाना है| वक्त के घनघोर अँधेरे में अपने व्यक्तित्व की सार्थकता एवं उत्कृष्टता का अनवरत दीप जलाए रखना है और यही संकल्प नव वर्ष में हम सब का जीवन लक्ष्य बने तो अँधेरे को उजाले का उपहार मिले|
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