जब सम्मान राजनीति का पक्षधर हो जाता है तब 'सम्मान वापसी' से भी सम्मान प्राप्त होने लगता है और सम्मान की मूल भावना का अपमान हो जाता है| इसलिए सम्मान वापसी को एक मात्र हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की बजाय विद्वत जन व्यापक जन हित में ठोस एवं निर्णायक लड़ाई लड़ने हेतु बेहतर रणनीति बनाने की क़वायद करें तो बेहतर है ताकि जन मानस की संवेदना एवं विश्वास का समर्थन भी हासिल हो सके,परंतु इसके लिए आवश्यक है भेदभाव रहित होकर हर मुद्दे पर ठोस आवाज बुलंद करने की अन्यथा बड़े से बड़े कदम एकांगी दृष्टिकोण की वजह से ढ़कोसला में तब्दील हो मानवता का माखौल उड़ाने लगते हैं|
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