Translate

Thursday, 14 January 2016

कहने और करने का फर्क

कुछ चींजे कहने की होती है और कुछ करने की| दुर्भाग्य है कि राजनीतिक स्तर पर, संचार के स्तर पर, प्रशासनिक स्तर पर यहाँ तक कि व्यक्तिगत संबंध के स्तर पर हम कहते कुछ हैं करते कुछ हैं और देश-दुनिया-समाज में अनावश्यक ही अपनी भद्द पिटवा कर अपनी साख मिट्टी में मिलवा लेते हैं|

No comments:

Post a Comment