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Saturday, 2 January 2016

अँधेरे को उजाले का उपहार

समय एवं समाज की मूल्यहीनता की वजह से कभी-कभी लगता है कि अपने ही सकारात्मक विचारों का साथ छूट रहा है| वक्त की नकारात्मक सोच स्वयं की सृजनात्मकता पर हावी हो रही है| संबंधों के लिए किया गया सार्थक प्रयास अनायास ही निरर्थक साबित हो रहे हैं| उत्कृष्ट कर्म सच्ची प्रशंसा एवं प्रोत्साहन के मोहताज हो गए हैं परन्तु जीवन का व्यापक उद्देश्य सामयिक एवं स्वार्थपूर्ण निंदा-प्रशंसा से परे अपने दूरगामी सार्थक लक्ष्य में धैर्यपूर्ण, शांतिपूर्ण व प्रेमपूर्ण तरीके से कामयाब हो जाना है| वक्त के घनघोर अँधेरे में अपने व्यक्तित्व की सार्थकता एवं उत्कृष्टता का अनवरत दीप जलाए रखना है और यही संकल्प नव वर्ष में हम सब का जीवन लक्ष्य बने तो अँधेरे को उजाले का उपहार मिले|

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