संपन्न वर्ग द्वारा बलपूर्वक सधिकार आरक्षण की मांग उस पुरानी वर्ण व्यवस्था को ही पोषित करता है जो यह मानता है कि श्रेष्ठ पर उसका ही अधिकार है तभी तो आरक्षण समानता के अधिकार की मूल भावना से निकलकर शक्तिशाली वर्ग द्वारा पुन: स्वयं को असमान करने की पुरजोर कोशिश बन गई है परंतु ऐसे में वर्तमान आरक्षण प्रणाली के महती दुरूपयोग एवं सामाजिक भेदभाव के शिकार व वंचितों तक लाभ न पहुँचने के दुष्परिणाम को अनदेखा नहीं किया जा सकता अन्यथा आरक्षण राजनीतिक हथियार के रूप में देश व समाज के लिए नासूर की तरह बना रहेगा| जिसकी वजह से युवा पीढ़ी भाव बोध व व्यवहार के स्तर पर भी स्वयं को बंटा हुआ एवं गुमराह महसूस करती रहेगी|
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Wednesday, 26 August 2015
Wednesday, 19 August 2015
Sunday, 16 August 2015
प्रगतिशीलता बरक्स मोह
वर्तमान की आलोचना जब अतीत और भविष्य को दरकिनार कर की जाती है तब वह कुतर्क में तब्दील हो जाती है|ऐसे में राजनीतिक दृष्टिदोष वाले विचारक प्रगतिशीलता की जगह मोह को केंद्र बिंदु में लाकर स्वयं के विचारों को और भी हास्यास्पद बना लेते हैं|
Friday, 14 August 2015
विचार
किसी व्यक्ति विशेष या दल की हर बात की निंदा या प्रशंसा करने वाला व्यक्ति अपनी गुलाम मानसिकता का परिचय देता है और स्वयं के विचारों का ही हनन करता है|
Friday, 7 August 2015
राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जब राजनीतिक स्वार्थ में तब्दील हो जाती है तब देश हित के मुद्दे ताक पर रख दिए जाते हैं|
Tuesday, 4 August 2015
दीपक
एक जलते दीपक से सभी बुझे दीपक रोशन हो सकते हैं,परंतु जो दीपक सदियों से अँधेरे में रहने की वजह से अँधेरे को ही स्वर्ग एवं आनंद का द्वार समझते हों वे कोशिश करते हैं कि जलता हुआ दीपक भी बुझ कर उन जैसा ही हो जाए लेकिन वे भूल जाते हैं कि एक जलता हुआ दीपक कभी-कभी अपने उजाले से पूरे संसार को आलोकित कर देता है|
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