जीवन में बौद्धिक हो जाना,आतंकी हो जाना, कट्टर हो जाना, प्रेम पूर्ण हो जाना, अंगुलिमाल का ह्रदय परिवर्तन हो जाना, विद्योत्तमा की उपेक्षा से कालिदास बन जाना, मृत्यु शय्या देखकर गौतम का बुद्ध बन जाना सबकुछ नजरिया बदल जाने का परिणाम है| इस अर्थ में जीवन एक नजरिया ही है| जीवन की समस्याएँ एवं उससे निपटने की अलग-अलग मानसिक क्षमताएं व्यक्ति के अपने नजरिए पर ही निर्भर है|
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