वातावरण बदलना ही महत्वपूर्ण है| प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय फलक पर हिंदी को पहचान दिलाकर अचानक ही खोई हुई अस्मिता को नई संजीवनी दी है और इस अस्मिता में अंग्रेजी के प्रति घृणा नहीं बल्कि हिंदी के प्रति स्वाभाविक प्रेम है,जो निश्चय ही फलीभूत होगा,ऐसा मेरा विश्वास है|
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