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Friday, 10 October 2014

उजाले की मंजिल

बाल श्रम उन्मूलन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दे के लिए श्री कैलाश सत्यार्थी  को नोबेल पुरस्कार मिलना गर्व का विषय है वहीँ उनके योगदानों को अपने ही देश की सरकार द्वारा उपेक्षित किया जाना यह रेखांकित करता है कि देश में सत्यनिष्ठा, कर्मशीलता अथार्त कर्म से गाँधीवादी होने का मूल्य क्या है? सचमुच भारत के राजनीतिज्ञों के लिए शर्म का विषय है कि वह एक उजाले को भी अँधेरे में दबाए रहे जबकि उजाले ने अपनी मंजिल खुद ही तय कर ली|

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