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Tuesday, 7 October 2014

बेगुनाह लोगों की जान

जब प्रशासनिक चूक एवं राजनीतिक नाकामी से बेगुनाह लोगों की जान चली जाती है और दुर्घटना की जांच व कार्रवाई दस्तावेजों में दफ़न हो जाती है| ऐसे में जब सियासत मोमबत्ती जलाकर एवं मुआवजा की घोषणा कर अपनी पीठ थपथपाता है तो मन सिहर जाता है| जिन लोगों पर बेगुनाहों की जान लेने का मुक़दमा चलना चाहिए वे ही मौत का सौदा करते हैं और बड़े फक्र से बेमौत की कीमत 3 लाख लगाकर जनता का मजाक उड़ाते हैं| अगर कोई वकील मित्र सर्वोच्च न्यायालय में पी आई एल डालकर भारत / राज्य सरकार से अब तक गठित जांच समितियों एवं उस पर हुई कार्रवाई के संबंध में कोई ठोस पहल कर सकें तो इसका दूरगामी असर हो सकता है|

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