बलात्कार की घटना को पुरुष बनाम स्त्री एवं पीड़ित बनाम दोषी तक सीमित कर देना अदूरदर्शिता की निशानी है| प्रतीकों,प्रदर्शनों एवं मीडिया को केंद्र में लाकर एकाध लड़ाई लड़ी जा सकती है,परंतु व्यवस्था परिवर्तन के लिए नागरिक,सत्ता तंत्र,न्याय तंत्र की जिम्मेदारी तय करने के साथ स्त्री-पुरुष समानता के अधिकार सहित ऐसे माहौल के निर्माण करने की जरुरत है जहाँ गलत करने के प्रति भय दंड की अनुभूति हो|
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