कई बार छद्म देशद्रोह आतंकवाद, देशद्रोह से ज्यादा ख़तरनाक साबित होता है क्योंकि नकारात्मकता स्वार्थलोलुपता के साथ मिलकर बहुत तेजी से जनमानस में व्याप्त हो जाती है और इसे फ़ैलाने में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोग क्षुद्र लाभ के लिए शामिल होते हैं व वैमनस्य का वातावरण तैयार कर आपसी सौहार्द को कायम नहीं होने देते|
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