हिंदी भाषा सहज,सरल,सटीक व मर्म स्पर्शी शब्दों के विपुल भंडार की सार्थक एवं संवेदनशील अभिव्यक्ति से अनायास ही दिल की भाषा का स्थान ले लेती है| इस वजह से भी हिंदी भाषा वक्ता एवं श्रोता में भावात्मक तारतम्य स्थापित कर प्रभावशाली भूमिका का निर्वाह करती है|
No comments:
Post a Comment