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Saturday, 19 July 2014

मिड डे मिल

मिड डे मिल पेट भरने के साथ-साथ भिखमंगापन भी विकसित कर रहा है| बचपन से ही हर एक चीज के लिए दूसरे का मोहताज बनने की भी शिक्षा दे रहा है|सरकार की आत्म निर्भर बनाने की ज्यादातर योजनाएं आत्म खोखलापन की शिकार हो गई हैं| सरकारी योजनाएं पेड़ लगाने वाली नहीं फल बाँटने वाली बन कर रह गई हैं| कभी लैपटाप,कभी साईकिल बांटकर जीवन की राह दिखाई जा रही है,पर इन योजनाओं में निरंतरता कितनी है| एकांगी योजनाओं के लाभ से कितने दिन घर में उजाला हो सकता है|यह भी विचारणीय प्रश्न है| जरुरत है राज्य/केंद्र स्तर पर बेहतर योजना के साथ एक किन्तु बड़ी और सार्थक योजना के कार्यान्वयन की|

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