राजनीति में गरीबी-अमीरी, जाति,धर्म आदि पर गर्मागर्म बहस कर जनता को कुछ होने का अहसास तो कराया जाता है परंतु फैसले सही-गलत के आधार पर नहीं बल्कि राजनीतिक फायदा के आधार पर लिए जाते हैं फिर हिंदी भाषियों के भविष्य से सरकार के वर्तमान पर कुछ खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा,विपक्ष में कोई ताकत है नहीं| इसलिए बहुत संभव है थोड़ी-बहुत रियायत देकर इस हिंदी आंदोलन को शांत कर दिया जाएगा और हिंदी आंदोलन से पैदा हुई आग राख में तब्दील हो जाएगी|
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