समय समाज
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Monday, 21 July 2014
हिंदी आलोचना
अधिकांश हिंदी आलोचना या तो प्रशस्ति के रूप में या निंदा के रूप में लिखी जा रही है| हिंदी आलोचक में सम्यक दृष्टि का अभाव उत्पन्न होना हिंदी साहित्य की दुर्गति का ही प्रतीक है|
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