पूजा और इबादत मनुष्य को मानवीय बनाने का नायाब नुस्खा है जो धर्मांधता में तब्दील होता जा रहा है| पूजा और इबारत के केंद्र तो विकसित हो रहे हैं पर दिल नहीं मिल रहे| आत्म विकास नहीं होने से समाज विकास भी नहीं हो रहा| ऐसे माहौल में भविष्य अंधकारमय हो जाए तो कोई विस्मय नहीं|
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