हिंदी आजाद देश की गुलाम भाषा बनकर रह गई है| जिन राजनीतिक एवं प्रशासनिक जंजीरों में हिंदी जकड़ दी गई है उससे मुक्ति की राह हिंदी के नए महात्मा गाँधी पैदा करके ही पूरी की जा सकती है| दिल्ली में आंदोलनरत हिंदी प्रेमियों के प्रति आँखें मूंदे सरकारें एवं मीडिया सरोकार ने यह साबित किया है कि उनकी हर आवाज देश के ताकतवर को ही बुलंदी प्रदान करती है| गरीब,असहाय,शोषित,वंचित लोगों की तरह हिंदी को भी हासिए पर डालने की पुरजोर कवायद हो रही है| जब हिंदी आंदोलन की यह चिंगारी आग बनकर फैलेगी तभी हिंदी और हिंदी प्रेमियों की दशा सुधरेगी| सभी हिंदी प्रेमी अपने स्तर से हिंदी मुहिम को धार दें तभी हिंदी और इस देश के अधिसंख्य गरीब हिंदी भाषी लोगों के प्रति न्याय होगा जो वर्षों से अपनी ही रोजी रोटी की भाषा को अपने ही घर में बेइज्जत होते देखने को विवश हैं|
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