समय समाज
Translate
Tuesday, 29 July 2014
अँधेरे में रहने वाली अभिसप्त आँखें
सदियों परंपरा,संस्कृति एवं धर्म से आबद्ध अँधेरे में रहने वाली अभिसप्त आँखें जब आत्मज्ञान की दृष्टि से बदलते वक्त के उजाले में खुलती हैं तब जीवन को रोशनी के लिए भटकना नहीं पड़ता|
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment