जब तक महंगाई का पैमाना डीजल,पेट्रोल,आलू-प्याज-टमाटर आदि है तब तक तो थोड़ी गनीमत है क्योंकि अधिकांश मध्यवर्ग,उच्च वर्ग इसे झेलने में स्वयं को किसी न किसी तरह सक्षम कर लेता है| अगर महंगाई का पैमाना खाने-पीने की अन्य वस्तुओं के साथ ईंट,गिट्टी से होते हुए पढाई-लिखाई ,किराया, स्वास्थ्य सेवाओं के बिल तक पहुँच जाए तो लोगों का जीना तो मुहाल है ही वो अनाप शनाप बयानबाजी वाले नेताओं का जीवन भी दूभर कर देंगे|
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