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Friday, 18 July 2014

बलात्कार

बलात्कार एक घटना से ज्यादा घृणित मानसिकता है जो जगह एवं व्यक्ति के बदलने के साथ बदस्तूर जारी है| जब तक पीड़ित व्यक्ति का ओहदा देखकर कार्रवाई की जाती रहेगी तब तक बलात्कार का पूरी तरह से सफाया नामुमकिन है| बलात्कार की घटना कहीं की हो, किसी जाति-धर्म के साथ हो आवाज और प्रतिरोध का स्वर आसमान को छूना चाहिए| दूसरी अहम बात बेटी,बहु,माँ को जितनी इज्जत मिलनी चाहिए,क्या हमारा समाज उनता सम्मान उन्हें दे पाता है? नहीं न, जब उच्च सम्मान की भावना न समाज में है,न फिल्मों में,न मीडिया में,न न्याय व्यवस्था में तो ऐसे में बलात्कारी मानसिकता पर सतत गंभीरता कैसे संभव है? 

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