बेमेल, दुरूह
और अपनी भावभूमि से कटे अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद की विवशता ने भी हिंदी की
मौलिकता, सरलता
एवं सहजता का हनन किया है| राजभाषा
हिंदी और आम बोलचाल की हिंदी में बड़ा फर्क इसका उदाहरण है| बेमेल
व निरर्थक अनुवाद की वजह से भी कई बार हिंदी भाषा उपहास
का पात्र बन जाती है तथा अंग्रेजियत
मानसिकता वाले लोगों को हिंदी भाषा को कमजोर
आंकने का एक आधार मिल जाता है|
No comments:
Post a Comment