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Monday, 28 July 2014

तब धर्म अपना अर्थ खो देता है

जब समाज अपने स्वार्थ के लिए पाप-पुण्य को सुविधानुसार परिभाषित करने लगता है तब धर्म अपना अर्थ खो देता है|

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