अच्छे दिन सरकार के आए हैं जनता के नहीं| जनता को शोषण,महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अत्याचार एवं अस्थिर वक्त की अंधी सुरंग में धकेल दिया गया है जहाँ अच्छे दिन के सपने आ सकते हैं पर अच्छे दिन नहीं | हाँ एकाध रोशनी टिमटिमाकर अच्छे दिन का आभास करा जाए तो ये और बात है|
No comments:
Post a Comment