भारतीय ओलंपिक संघ शतरंज के खिलाड़ी की तरह अपने खिलाड़ियों के कैरियर से खेलता रहता है और जो प्रतिभाशाली खिलाड़ी पसंद नहीं आते उसे प्यादे की तरह दरकिनार कर दिया जाता है| अपने चहेते खिलाड़ियों के हिसाब से नए नियम बना दिए जाते हैं| बावजूद इसके विपरीत स्थिति में हमारे खिलाड़ी देश का नाम रौशन करते रहते हैं परंतु जिस देश में खेल को दिशा दिखाने वाले खिलाड़ी की जगह व्यवसायी एवं नेता होंगें उस देश का खेल भविष्य और देश के खेल की बुनियादी सुविधाओं एवं खिलाड़ियों की प्रतिभावों से खिलवाड़ ही होता रहेगा| ऐसे में पदाधिकारी रंगरेलियां मानते पकड़े जाएँ तो कोई ताज्जुब नहीं है|
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