समय समाज
Translate
Sunday, 10 August 2014
जीवन
जीवन की नदी में जब विवेक - बुद्धि के पतवार से मन व विचार की नाव खेवी जाती है तब प्रतिकूल धाराओं में भी चलना सहज लगता है अन्यथा जीवन समय की धारा की कठपुतली बन कर रह जाता है|
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment