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Saturday, 31 January 2015

दिमाग की गंदगी

दिमाग की गंदगी ही सामाजिक एवं सांस्कृतिक दुर्गंध पैदा कर मानवता को शर्मशार करती है| भावों एवं विचारों की स्वच्छता से ही आत्मविकास व जन कल्याण संभव है|

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