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Saturday, 31 January 2015

झूठ का विज्ञापन

भारत सरकार के सर्वोच्च सम्मान से अभिनेताओं/खिलाडियों को तभी सम्मानित किया जाना चाहिए जब वे बाजारवादी विज्ञापनों से परहेज करते हुए सामाजिक योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने का लिखित आश्वासन दें| अन्यथा यह ढोंग लगता है कि भारत रत्न/पद्म श्री/पद्म विभूषण से सम्मानित लोग साबुन/तेल आदि के झूठे गुणों का प्रचार कर आम जन की भावनाओं से खेलते हैं| ऐसे लोगों को स्वत: ही बाजारवादी सोच से ऊपर उठ कर जन हितार्थ कार्य करना चाहिए क्योंकि जिस ओहदे पर सम्मान प्राप्त करने वाले अभिनेता/खिलाडी होते हैं वहां धन से ज्यादा सम्मान का मूल्य है| 

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