अन्ना आन्दोलन को धार देने की जिन लोगों पर प्रमुख जिम्मेदारी थी वे सभी राजनीति की धार में बहकर देश की जनता के अरमानों को किनारे लगा गए| देखना यह है, कि ये लोग जहाँ हैं वहां वे अपने तात्कालिक लाभ से उबरते हुए कितना अपनी पहचान बना पाते हैं| अन्ना हजारे तो एक मोहरा बनकर रह गए और एक आग जो वक्त की पहचान बन सकती थी वह आग वक्त के पहले ही बुझा दी गई|
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