Translate

Tuesday, 2 January 2018

ऊर्जा

कई बार हम रेत में पौधा रोप कर फूल खिलने की उम्मीद लगाए रहते हैं और अपना कीमती समय एवं ऊर्जा नाहक ही बर्बाद कर देते हैं।

Monday, 1 January 2018

आश्रित

जब आप किसी के ऊपर पूर्णत: आश्रित हो जाते हैं तो उसकी हाँथों की कठपुतली बन जाते हैं।

धन

धन चाहे सबके पास एक समान क्यों न हो उसकी कीमत सबके लिए अलग-अलग होती है।

असल

दिखावटीपन को सहज ढंग से जीवन का अंग बना लेने से असल की पहचान ही गुम हो जाती है।

प्रेम

प्रेम की खूबसूरती यह है कि वह बेशर्त एवं बेपनाह होता है और जहाँ शर्त एवं सीमाएं होती हैं वहाँ प्रेम नहीं होता।

विवेक शून्यता

किसी को पसंद-नापसंद करने की आपकी व्यक्तिगत सोच-समझ पर जब दुनियावी प्रवृति हावी होने लगती है तब आप अपनी विवेक शून्यता की ओर अग्रसर होने लगते हैं।

सच

कई बार सच इतना कड़ुआ होता है कि वह ताउम्र फासले की वजह बन जाता है।

बाजी

कई बार आपको अपने सबसे कमजोर साथी पर ही सबसे ज्यादा भरोसा करना पड़ता है क्योंकि वही उस वक्त हारी हुई बाजी पलटने में सक्षम होता है।

Tuesday, 26 December 2017

इंसान

बड़ा आदमी होकर छोटा इंसान बनने से बेहतर है छोटा आदमी रहकर बड़ा इंसान बनना।

संवेदनशीलता

जब किसी के पास असीम ताकत आ जाती है तब उसका मूल्यांकन उसकी ताकत की वजह से नहीं बल्कि उसकी संवेदनशीलता की वजह से की जानी चाहिए।

Tuesday, 19 December 2017

रिश्ता

कई बार हम जीवन के जिस मोड़ पर खड़े होते हैं वहाँ से हमें रिश्तों को आगे देखने की जरूरत होती है और हम पीछे मुड़ कर साथ छोड़ने वाले साथी को देखते रह जाते हैं।

Sunday, 17 December 2017

बेमानी

लड़ाइयों, नफ़रतों से गुज़रते हुए जब हम अपना जीवन युद्ध समाप्त कर रहे होंगे तब तक ये लड़ाइयां बेमानी हो चुकी होंगी और यह जीवन भी।

Saturday, 16 December 2017

अहंकार

यह समय अहंकार का समय है। सत्ता से राजनीति तक में अहंकार व्याप्त है। मीडिया में अहंकार की भाषा की प्रमुखता है। आलोचक भी आक्रामक हो गए हैं और सबसे ज्यादा नुकसान भी हमारे समाज को अहंकार से ही हो रहा है।

दिशाविहीन समाज

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने अपने महापुरुषों को प्रतीक मात्र में तब्दील कर दिया है और उनके सपनों एवं विचारों को भूल कर एक दिशाविहीन समाज की ओर अग्रसर हैं।

प्रतिभा

अगर प्रतिभा का सम्मान समाज न कर पाए तो दोष प्रतिभा का नहीं समाज का है।

ग़लत

ग़लत लोगों से सही की उम्मीद करना खुद को ही ग़लत ठहराना है।

भेड़चाल

शिक्षित व्यक्ति का विचार जब भेड़चाल का शिकार हो जाता है तब शिक्षा का मूल्य भी व्यर्थ हो जाता है।

वादा

खुद को किए वादे को निभाने की बजाय हम दुनिया से किए वादे निभाने में ही जिंदगी बिता देते हैं और फिर पछताते हैं कि जिंदगी ने हमें दिया ही क्या है?

व्यक्तित्व

जब आप किसी व्यक्ति विशेष का मूल्यांकन करते समय उसे किसी जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र, वर्ग विशेष से जोड़ देते हैं तो उसके व्यक्तित्व को छोटा कर देते हैं।

कीमत

चंद लोगों के बेहिसाब दौलत, अय्याशी, वहशीपन की कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ती है।

ज़बान

कुछ लोगों की अपनी कोई ज़बान नहीं होती फिर भी वे बोलते बहुत हैं।

बीज

जब प्रतिकूल ऊर्जा का सदुपयोग करना आ जाता है तब असफलता में भी सफलता का बीज नज़र आता है।

Friday, 1 December 2017

आलोचना

जनता द्वारा चुनी हुई सरकार की सार्थक आलोचना की बजाय उसके प्रति घृणित विचारधारा रखना व्यक्तिगत कुंठा की पराकाष्ठा एवं जन भावनाओं का अपमान है।

Sunday, 26 November 2017

हिंसा

समाज में हिंसा इतनी सहज स्वीकार्य हो गई है कि अहिंसक लोग ही असहज महसूस करने लगे हैं।

दिखावा

दिखावा दोनों ही निंदनीय है चाहे वह अमीर होकर गरीब का हो या गरीब होकर अमीर का हो।

जातिवाद

जातिवाद आधारित ज्यादातर संघठन न तो खुद का हित कर पा रहे हैं न समाज का।

दुःख

दुःख तब नहीं होता जब कोई नहीं चलता बल्कि दुःख तब होता है जब कोई अपनी पूरी ताकत से चलता है और कोई उसे जबरन रोक देता है।

दृष्टि

कई बार परिस्थिति वश दृष्टि संकुचित हो जाती है जो परिस्थिति बदलने के वाबजूद व्यापक नहीं हो पाती।

Wednesday, 22 November 2017

व्यक्तित्व

जीवन की सफलता पद नहीं व्यक्तित्व है। इसलिए भी व्यक्तित्व की ऊंचाई के सामने पद की ऊंचाई बौनी साबित हो जाती है।

बच्चे

जीवन के पूर्वार्ध में हम बच्चों को समय नहीं दे पाते एवं उत्तरार्ध में बच्चे।

पूजा

जब आप किसी की पूजा करने लगते हैं तो उसके पापों को भी सहज स्वीकार कर लेते हैं।

हार

अपनी असीम क्षमता को पहचाने बिना छोटी-छोटी समस्याओं से घिरे रहने की मानसिक प्रवृति ही अक्सर हार का कारण बनती है।

दृष्टि

कई बार हम अपने जीवन में जो विचारों का चश्मा पहनते हैं उसे चाहे-अनचाहे कभी उतार ही नहीं पाते चाहे दृष्टि ही क्यों न खो जाए।

सम्मान

अगर प्रतिभा का सम्मान समाज न कर पाए तो दोष प्रतिभा का नहीं समाज का है।

खेल

कुछ लोग अपनी जिंदगी से खेल कर खुद को बर्बाद कर लेते हैं और कुछ लोग अपनी जिंदगी को खेल-खेल में व्यतीत कर लेते हैं।

सामंजस्य

आपके शब्द एवं अर्थ का आपके जीवन से भी सामंजस्य होना आवश्यक है अन्यथा सब व्यर्थ है।

सही

दूसरे को गलत साबित करने से ज्यादा जरूरी खुद को सही साबित करना है।

कद

अक्सर हम अपना कद बड़ा करने की बजाय दूसरे का कद कम करने में लगे रहते हैं और अंततः अपना ही कद कम कर लेते हैं।

Thursday, 28 September 2017

प्रतिदान

जब प्रेम प्रतिदान चाहता है तो खुद को छोटा कर लेता है।

Sunday, 13 August 2017

मानसिक सम्पन्नता

कई बार आर्थिक सम्पन्नता के वाबजूद मानसिक विपन्नता नहीं जाती और कई बार आर्थिक विपन्नता के वाबजूद मानसिक सम्पन्नता आ जाती है। 

मानसिक सम्पन्नता आर्थिक सम्पन्नता से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण व मूल्यवान है और मानसिक सम्पन्नता मानव धर्म का पर्याय भी है जिसके लिए हृदय की उदारता व प्रेम अनिवार्य है।

रणक्षेत्र

जिंदगी के रणक्षेत्र में चाहने वाले भी हैं और वार करने वाले भी।
दोनों जरूरी हैं। दोनों का सम्मान जरूरी।

जिंदगी की पिच

जिंदगी की पिच पर अगर कोई ख़राब खेल रहा हो तो क्रिकेट की तरह उस वक्त अत्यंत कौशल एवं धैर्य से खेलने की जरूरत होती है ताकि उस संबंध की रक्षा की जा सके एवं जिंदगी की जंग को प्रेमपूर्वक व सम्मान सहित जीता जा सके।

पिता

जब तक पिता जीवन रथ के सारथी हैं तब तक संतान अपराजेय है।

प्रतिभा

जो प्रतिभा दबाव में निखरे वही सम्मान योग्य है।

भयावह सभ्यता

मन,वचन,कर्म से हम हिंसक समाज की ओर बढ़ते जा रहे हैं और जाने-अनजाने वैश्विक स्तर पर भयावह सभ्यता पाँव पसार रही है।

लेखन

लेखन
संजीदा लोगों की भाषा एवं सोच में भी पीत पत्रिकारिता घर करती जा रही है और लेखन प्रतिक्रियावादी होता जा रहा है जिससे विमर्श का स्वरूप संकुचित होता जा रहा है।

कुल मिलाकर लेखन सामंजस्यता के बरक्स दो गुटों के वैमनस्य का शिकार हो गया है।

नारी समाज

भारतीय समाज अपने तमाम प्रयत्नों के वाबजूद नारी को पूर्ण सुरक्षा व सम्मान देने में नाकाम ही रहा है और दुःखद यह भी कि नारी समाज स्वयं भी अपने आत्म सम्मान के प्रति पूर्ण जागरूक व संजीदा नहीं है। 

फासले

कुछ फासले सदियों के पल भर में तय हो जाते हैं
कुछ फासलों को तय करने में जीवन बीत जाता है|

भयावह समय

इस भयावह समय में अपने अंदर प्रेम व सम्मान बचाए रखना स्वयं के लिए एक बड़ी चुनौती है।

नाकाम

कई लोगों को सीमित शिक्षा के वाबजूद जिंदगी की कठिन परीक्षा में सफल होने का असीमित अनुभव होता है और कई लोग उच्चतम शिक्षा के वाबजूद जिंदगी में नाकाम हो जाते हैं।