लेखन
संजीदा लोगों की भाषा एवं सोच में भी पीत पत्रिकारिता घर करती जा रही है और लेखन प्रतिक्रियावादी होता जा रहा है जिससे विमर्श का स्वरूप संकुचित होता जा रहा है।
कुल मिलाकर लेखन सामंजस्यता के बरक्स दो गुटों के वैमनस्य का शिकार हो गया है।
संजीदा लोगों की भाषा एवं सोच में भी पीत पत्रिकारिता घर करती जा रही है और लेखन प्रतिक्रियावादी होता जा रहा है जिससे विमर्श का स्वरूप संकुचित होता जा रहा है।
कुल मिलाकर लेखन सामंजस्यता के बरक्स दो गुटों के वैमनस्य का शिकार हो गया है।
No comments:
Post a Comment