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Sunday, 13 August 2017

लेखन

लेखन
संजीदा लोगों की भाषा एवं सोच में भी पीत पत्रिकारिता घर करती जा रही है और लेखन प्रतिक्रियावादी होता जा रहा है जिससे विमर्श का स्वरूप संकुचित होता जा रहा है।

कुल मिलाकर लेखन सामंजस्यता के बरक्स दो गुटों के वैमनस्य का शिकार हो गया है।

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