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Saturday, 16 December 2017

दिशाविहीन समाज

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमने अपने महापुरुषों को प्रतीक मात्र में तब्दील कर दिया है और उनके सपनों एवं विचारों को भूल कर एक दिशाविहीन समाज की ओर अग्रसर हैं।

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