समय समाज
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Saturday, 16 December 2017
वादा
खुद को किए वादे को निभाने की बजाय हम दुनिया से किए वादे निभाने में ही जिंदगी बिता देते हैं और फिर पछताते हैं कि जिंदगी ने हमें दिया ही क्या है?
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