इस बार का दिल्ली चुनाव प्रचार ऐतिहासिक रहा| 70 सीटों वाली छोटी विधानसभा के लिए ताबड़तोड़ प्रचार,महंगे प्रचार माध्यम एवं मीडिया के जरिए ऐसा प्रतीत हुआ कि चुनाव मोदी बरक्स केजरीवाल के बीच न होकर भारत-पाकिस्तान के बीच हो रहा हो| स्वच्छता की दुहाई देने वाले लोग अपने संबोधनों में सारी मर्यादाएं तोड़ते नजर आए| इस देश में स्वच्छता अभियान चलाए जाने से ज्यादा जरुरी है वैचारिक स्वच्छता स्थापित की जाए|
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