समय समाज
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Tuesday, 24 February 2015
इंतजार
जैसे किताबें घर में रहकर अपने पढने का इंतजार करती हैं वैसे ही मैं पास रहकर इंतजार करता रहता हूँ कि तुम कभी वक्त निकालकर मुझे पढ सको |
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