समय समाज
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Thursday, 16 August 2018
नैतिक पराजय
संवेदनशीलता से संवेदनहीनता की ओर उन्मुख होते समाज में अब हृदयविदारक खबरें भी हृदय को द्रवित नहीं करतीं। पत्थर दिल होती मनुष्यता के लिए इससे बड़ी नैतिक पराजय और क्या होगी?
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