समय समाज
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Friday, 1 June 2018
सृजन
सृजन अगर स्वयं के लिए हो तो वह स्वयं को भी समृद्ध करता है और लोक को भी अन्यथा रचना से दुनिया चाहे बदल जाए,रचनाकार नहीं बदल पाता|
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